स्वयं की खोज: अस्तित्व, स्थान और उद्देश्य
1. मैं कौन हूँ?
साधारण तौर पर हम अपनी पहचान नाम, पेशे या रिश्तों से जोड़ते हैं। लेकिन गहराई में उतरें, तो आप वह 'चेतना' हैं जो इन सभी भूमिकाओं को देख रही है। आप न तो केवल आपका शरीर हैं और न ही केवल आपके विचार, क्योंकि ये दोनों समय के साथ बदलते रहते हैं। आप वह 'साक्षी' (Observer) हैं जो हर अनुभव के पीछे स्थिर रहता है।
2. स्वयं को कहाँ खोजूँ?
स्वयं की खोज बाहर की दुनिया में, किताबों में या अन्य लोगों की राय में नहीं की जा सकती। खोज का मार्ग भीतर की ओर जाता है।
• मौन में: जब मन के विचारों का शोर कम होता है, तब स्वयं की आवाज़ सुनाई देती है।
• अकेलेपन में नहीं, एकांत में: एकांत वह समय है जब आप बिना किसी बाहरी प्रभाव के खुद के साथ होते हैं।
• अपने कर्मों में: आप जो काम बिना किसी स्वार्थ और पूरी तन्मयता से करते हैं, वहीं आपकी आत्मा की झलक मिलती है।
3. इस संसार में आने का उद्देश्य क्या है?
जीवन का कोई एक 'तैयार' उद्देश्य नहीं होता जिसे आपको ढूंढना है, बल्कि इसे आपको स्वयं निर्मित करना होता है। इसके तीन मुख्य पहलू हो सकते...
Out Of Mind Mind is very confusing and sometimes block the thought process of the persons. Why It happens? After lot of spiritual thoughts I come to a conclusion that every person has a strong feeling of wanting anything which he or she require or has a very strong wish to happen something in his or her favor. From childhood’s wishes, fantasies, & hopes, teenage age confusing & burning desires, passion, sensuality, infatuations, yearnings & cravings ; Youth age sexual appetite, lust, carnal passions, desperation's, monetary desperation's, blind desires of flying high; Adulthood’s expectations for survival & social recognition's , and finally longings of peace and intimacy, Spiritual renunciation with advancing age to the lingering death there is only one truth that everyone is having Wanting & Desires. This wanting, desires, passion, cravings & yearnings causing lot of complexities, confusions, d...
वैदिक ज्योतिष व नक्षत्र वैदिक ज्योतिष ( Vedic Astrology) की विशाल दुनिया में नक्षत्र वे सूक्ष्म सूत्र हैं जो भविष्यवाणियों को सबसे सटीक और गहरा बनाते हैं। जहाँ राशियाँ ( Zodiac Signs) 30 डिग्री के बड़े क्षेत्र को कवर करती हैं, वहीं नक्षत्र इसे 13 डिग्री 20 मिनट के छोटे हिस्सों में बाँटते हैं, जिससे फलकथन में सूक्ष्मता आती है यहाँ नक्षत्रों की सटीकता और उनके महत्व पर एक संक्षिप्त लेख है: नक्षत्र: वैदिक ज्योतिष की सूक्ष्म दृष्टि भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आकाश मंडल को 27 समान भागों में विभाजित किया गया है, जिन्हें 'नक्षत्र' कहा जाता है। चंद्रमा जिस नक्षत्र में जन्म के समय स्थित होता है, उसे व्यक्ति का 'जन्म नक्षत्र' माना जाता है। यही नक्षत्र व्यक्ति के स्वभाव, भाग्य और जीवन के उतार-चढ़ाव की असली कुंजी है। 1. राशियों से अधिक सटीक क्यों? एक राशि (जैसे मेष या वृषभ) 30 डिग्री की होती है, जिसमें सवा दो नक्षत्र समाहित होते हैं। यदि दो व्यक्तियों की राशि एक ही है, तब भी उनके स्वभाव में जमीन-आसमान का अंतर हो सकता है। यह अंतर नक्षत्रों के कारण आता है। न...
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