Progression & Precession

 

वैदिक ज्योतिष में प्रोग्रेस (Progression/दशा/प्रगति) और प्रिसेशन (Precession/अयनॉन्श) दो अलग-अलग महत्वपूर्ण अवधारणाएं हैं, जो भविष्यवाणी और गणना के आधार हैं

1. वैदिक ज्योतिष में प्रगति (Progression - Dasha System)

वैदिक ज्योतिष में पश्चिमी ज्योतिष की तरह "सेकेंडरी प्रोग्रेशन" (1 दिन = 1 वर्ष) का उपयोग कम होता है। इसके बजाय, दशा प्रणाली (Dasa System) को प्रोग्रेस का सबसे सटीक और प्रमुख तरीका माना जाता है।

·        मूल अवधारणा (Maharishi Parashar's 42 Dasa Systems): महर्षि पराशर ने दशा प्रणालियों का वर्णन किया है, जो जन्म के समय ग्रहों की स्थिति के आधार पर जीवन की घटनाओं को दर्शाती हैं।

·        विंशोत्तरी दशा (Vimshottari Dasha): यह सबसे आम है, जो 120 वर्षों के जीवन चक्र को मानती है। यह बताती है कि व्यक्ति की जन्म कुंडली के ग्रह कब और कितना फल देंगे।

·        अन्य दशाएं: योगिनी दशा (Yogini Dasha) या जैमिनी चर दशा भी प्रगति देखने के लिए उपयोग की जाती हैं।

·        उपयोग: दशाएं यह निर्धारित करती हैं कि जन्म कुंडली के शुभ या अशुभ फल कब मिलेंगे (जैसे - महादशा, अंतर्दशा)। [1, 2, 3, 4, 5]

2. वैदिक ज्योतिष में प्रिसेशन (Precession - Ayanamsha)

वैदिक ज्योतिष में प्रिसेशन का अर्थ अयनांश (Ayanamsha) है, जिसे अग्रगमन या अयन-चलन भी कहा जाता है।

·        परिभाषा: पृथ्वी की धुरी के धीमे घूमने (Precession of Equinoxes) के कारण, नक्षत्रों और राशियों के सापेक्ष सूर्य की स्थिति में जो अंतर आता है, उसे अयोध्या (अयनांश) कहते हैं।

·        वैदिक ज्योतिष का आधार (Nirayana System): पश्चिमी ज्योतिष 'सायन' (Tropical) है, जबकि वैदिक ज्योतिष 'निरयन' (Sidereal) है, जो अयनांश पर आधारित है।

·        अयनॉन्श का महत्व: वैदिक ज्योतिष में हमेशा स्थिर तारों (Fixed Stars) के आधार पर गणना की जाती है। चूँकि पृथ्वी की धुरी प्रतिवर्ष लगभग \(50.3\) सेकंड की दर से खिसकती है, इसलिए हर साल कुंडली में कुछ सेकंड का अंतर आ जाता है।

·        लाहिड़ी अयनांश (Lahiri Ayanamsha): आधुनिक वैदिक ज्योतिष में सबसे आम तौर पर चित्रा पक्षा अयनांश (Lahiri Ayanamsha) का उपयोग किया जाता है।

निष्कर्ष

·        Progression (दशा) व्यक्ति के जीवन में ग्रहों के फल मिलने के समय (Timing of Events) को दर्शाती है।

·        Precession (अयनांश) सूर्य और नक्षत्रों की सटीक स्थिति की गणना (Accurate Position) को दर्शाती है।

संक्षेप में, प्रोग्रेस समय की गति है और प्रिसेशन स्थान की गति है।

 

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